पर्युषण पर्व पर हिंदी स्पीच / निबंध Hindi Speech / Essay on Paryushan Parv

August 28, 2018
मेरे सभी साधर्मी भाई-बहनों को मेरा जय जिनेंद्र! हमारा प्यारा पर्युषण पर्व आ रहा है। जिसका हम बेसब्री से  इंतजार करते हैं। क्योंकि पर्युषण के दिन ही ऐसे दिन होते हैं, जब हम भौतिक साधनों से अपने आप को दूर रख कर आत्म साधना में लीन हो जाते हैं। इस साल पर्युषण पर्व में हम ऐसी आराधना करें कि साल भर हमारी वह आराधना निरंतर चलती रहे।  पर्युषण पर्व पर हिंदी स्पीच / निबंध  मैं आपके साथ शेयर कर रही हूं...

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पर्युषण पर्व पर हिंदी स्पीच / निबंध

Hindi Speech / Essay on Paryushan Parv


          पर्युषण महापर्व एक ऐसा पावनकारी पर्व है, जिसके आगमन से मानव की सुप्त शक्तियां जागृत बन जाती है। वर्षभर कुछ भी न करने वाले भी इस पर्व की प्रेरणा से पावनकारी बनते हैं।  जैनों का एक भी ऐसा घर न होगा, जो इस पर्व के पदार्पण से नवपल्लवित ना बना हो। पर्वाधिराज पर्युषण आत्मा को उस पार पहुंचाने वाला पावन पर्व है। इस पर्व की सुंदरतम किरणें आत्मा के अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का उजाला हमारे जीवन में फैलाती है। विनय बिना विद्या और सुगंध बिना पुष्प की शोभा नहीं होती, वैसे ही पर्युषण पर्व की सुंदरतम साधना आराधना उल्लास के बिना नहीं होती। पाप की पूंजी को नष्ट करने के लिए इस पर्व की हमें आराधना करनी चाहिए।

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         पर्वाधिराज के पदार्पण से शुभ भावों का हमारे मन में संचार होता है। अनंत काल के भूलों को सुधारने, गुणों की वृद्धि करने और बुराई को समाप्त करने के लिए यह मंगल पवित्र पर्व अपने आंगन में आया है। जिस प्रकार पूनम और अमावस्या के दिन दरिया में जोरो का ज्वार आता है, अन्य दिन में इतना नहीं आता, वैसे ही इन दिनों में तप, त्याग में अधिक उत्साह आता है। इसलिए इन दिनों की महत्ता अधिक होती है। भगवान ने इस पर्व की महिमा बताते हुए कहा है, जैसे मंत्रों में परमेष्टी मंत्र, दान में अभयदान, व्रत में ब्रम्हचर्य, गुण में विनय श्रेष्ठ है, वैसे ही सभी पर्वों में पर्युषण सब से श्रेष्ठ है। पर्युषण सब पर्वों का राजा है।

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              पर्युषण पर्व हमें आत्मा की स्मृति कराने के लिए आए हैं। यह कहते हैं कि, " हें! जीव आत्मा के सम्मुख हुए बिना धर्म साधना का सच्चा आनंद, अनुभव नहीं हो सकता। क्योंकि धर्म साधना आत्मा के सम्मुख होने के लिए ही है। यदि आत्मा का लक्ष्य विकसित किए बिना जीवन का अंत आ जाएगा तो हम परलोक में क्या लेकर जाएंगे?

              इन दिनों में सामान्य दिनों के मुकाबले दान, शील, तप, भाव की विविध आराधना जोर-शोर से होती है। यह जोरदार आराधना मोहनगरी पर लगातार आक्रमण रूप बनाती है। जिस प्रकार 2 राजाओं के बीच में युद्ध हो। एक राजा के पास बड़ी सेना, शस्त्र हो और दूसरे राजा के पास सेना और शस्त्र कम हो। अगर बड़े राजा की सेना अगर लगातार हमला करती रहे तो छोटे राजा की सेना हार मान लेती हैं और अपना समर्पण कर देती हैं। यहाँ विशेषता छोटे या बड़े कि नहीं लेकिन जिस की धार लगातार जोरदार है, विजय उसी की होती है। इसी प्रकार पर्युषण महापर्व में मोह राजा के पर दान, शील, तप, भाव की आराधना का लगातार, जोरदार हमला होता है, जिससे वह मोह राजा हार जाता है।

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             इस पर्व के आगमन से सभी तरह खुशियां छा जाती है। खिलता गुलाब जैसे आपने मदभरी सुवास चारों और प्रसारित करता है। वैसे ही धर्म रूपी सुवास को फैलाता यह पर्व हमारे आंगन में आ गया है। इस पर्व के आने से ह्रदय में मैत्री भाव तथा अहिंसा का पवित्र झरना बहता है। अनादि काल के मोह और वासना के संस्कार दूर कर  धर्म की सुगंध प्रसारित करता है। इस पर्व की आराधना हमें अंतरमन के आंगन में क्षमा के अशोक पल्लव बांधकर, आराधना की विविध रंगोली सजाकर, तप त्याग का दीपक जलाएं। जिससे आत्मा के कोने-कोने में जगमग प्रकाश खुल फैल जाए।

दोस्तों ! आशा है, पर्युषण पर्व पर बनाया हुआ यह हिंदी स्पीच / निबंध आप सभी को अच्छा लगा होगा। इसे अपने साधर्मी भाई-बहनों के साथ भी शेयर करें। जैन धर्म पर बनाई हुई कविता, नाटिका, शायरी आदि  पढ़ने के लिए आप रूपमय  वेबसाइट पर जरूर विजिट करें। पर्युषण पर्व की आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं।

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